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चलिये इस बार घूमने चलते हैं दक्षिण भारत के कुछ प्रांत में..

 चलिये इस बार घूमने चलते हैं दक्षिण भारत के कुछ प्रांत में..

सबसे पहले सोनभद्र से मिर्ज़ापुर,लखनऊ होते हुए बंगलुरु तक के सफर की बातें..


मौका था अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय अधिवेशन का, जो कि आयोजित था कर्नाटक राज्य के बंगलुरू में।

तो हुआ कुछ यूं कि संघमित्रा एक्सप्रेस जो कि हमारे नजदीकी रेलवे स्टेशन मिर्जापुर (जी हां वही कालीन भैया वाला मिर्जापुर) से बेंगलुरु के लिए हमने बुक की थी, स्लीपर क्लास में, क्यों कि और  दूसरे कम्पार्टमेंट में जगह खाली नही थी क्यों कि इस रूट पर, गन्तव्य के लिए एकमात्र यही ट्रेन उपलब्ध है। रात के 12 बजे के आस पास का समय, तभी धीरे से दबे पांव वो ट्रेन स्टेशन पर लगी और ये क्या !!! ट्रेन के स्लीपर कोच में पांव रखने तक की जगह नही !

आज की रात, कल का दिन, कल की रात, परसों का पूरा दिन था जो कि इसी ट्रेन में गुजारना था, सो हम लोगों ने ट्रेन में बोर्ड न करने का निर्णय लिया। हम लोग मतलब (संघ के पदाधिकारीगण के रूप में हम सात लोग)। फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के अंतर्गत सिर्फ और सिर्फ हवाई मार्ग का ही विकल्प उपलब्ध था ससमय अधिवेशन में पहुचने के लिए, जो कि लखनऊ एयरपोर्ट से डायरेक्ट बंगलुरू के लिए था। हम लोगों ने ट्रेन को छोड़ देना ही उचित समझा जो कि वाकई सुकून भरा निर्णय रहा हम सबके लिए। फिर आनन फानन में उस वैकल्पिक व्यवस्था को अमलीजामा पहनाते हुए हम लोग अगले दिन पहुचे लखनऊ के चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट पर जंहा से इंडिगो की डायरेक्ट फ्लाइट थी, जिसका ट्रेवल टाइम लगभग सवा दो घण्टे का होने वाला था। चूंकि वेब चेक इन पहले ही कर लिया था सो सबके साथ सीधे पहुचे बैगेज काउंटर पर जंहा अपना 12 kg का बैग जमा किया और हैंड बैग(पिट्ठू बैग) ले के पहुचे  सिक्योरिटी चेक पे, जंहा बहुत ही आसानी से सिक्योरटी चेक हुआ और हमे एयरपोर्ट में घुसने की अनुमति मिल गयी। शिड्यूल के अनुसार अभी हमारे फ्लाइट की टाइमिंग में एक घण्टे शेष थे तो मैं पहुच गया लखनऊ एयरपोर्ट पर बने लाउंज में जंहा अनलिमिटेड डिनर/स्नैक्स वग़ैरह का आनंद भी लिया गया मात्र 25 रुपये के भुगतान में, जिसका एंट्री फी 795 रुपये था, लेकिन यदि आपके पास कुछ विशेष क्रेडिट या डेबिट कार्ड हो तो आपको ये सुविधा 2 रुपये या 25 रुपये के भुगतान पर मिल जाएगी।

 ये लाउंज, अन्य एयरपोर्ट के मुकाबले काफी छोटा और लिमिटेड स्पेस के साथ था फिर भी डिनर का स्वाद ठीक ठाक था। लाउंज में डिनर करने के बाद पहुचे अपने सीट पर जो कि संयोग वश 16A थी, मतलब विंडो सीट, लेकिन रात का समय था तो बहुत औचित्य नही था विंडो सीट का सो हमने अपने अग्रज से एक्सचेंज कर ली ताकि उन्हें भी विंडो सीट का आनंद मिल सके। इस विमान की एक बात ठीक लगी कि इसमें लेग स्पेस ठीक ठाक रहा। विमान में मौजूद क्रू मेंबर्स द्वारा सभी को बड़ी शालीनता से स्नैक्स वगैरह उपलब्ध कराया गया। दो ढाई घण्टे के एयर ट्रेवल के बाद हम लोग थे बेंगलुरु के एयरपोर्ट पर जो कि केम्पेगौड़ा जी के नाम पर उस एयरपोर्ट का नाम था। वँहा से बैगैज क्लेम काउंटर पर अपना अपना लगेज ले के हम लोग निकले बाहर अपने गंतव्य की ओर..

क्रमशः





























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