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पूर्वोत्तर राज्य की सैर (सातवां दिन)


आज हमारे ट्रिप का बहुत ही बेहतरीन दिन होने वाला था, आज हम सभी के लिए एक अलग ही अनुभव लेने का समय आ चुका था, हम लोग निकले बूम ला पास के लिए जो कि 15200 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित है और यंहा चीन और भारत की सेना आमने सामने रहती है। बूम ला पास जाने के लिए परमिट बनवाना पड़ता है जो कि एक दिन पहले बनवाना होता है और वँहा आपको घुमाने के लिए लोकल टैक्सी हायर करनी होती है, वँहा के लोकल टैक्सी यूनियन द्वारा लिया गया निर्णय जिसे सभी मानते हैं। तो हम लोगों के लिए आज की हमारी गाड़ी सुबह 6 बजे होटल आ गयी, हम लोग बूम ला के लिए निकले तभी पता चला कि साल में तीन चार दिन ऐसा होता है जब बूम ला पास पर चीनी  और भारतीय सैन्य अधिकारियों की बैठक होती है, संयोग से वो बैठक उसी दिन प्रस्तावित थी, खुशकिस्मती रही कि वो मीटिंग टल गई और हम लोगों को आगे जाने दिया गया। दूसरे आर्मी चेक पोस्ट पर हम लोगों की एंट्री रेजिस्टर पर हुई वो भी ILP डिटेल के साथ। अरुणाचल में घूमने के लिए सभी को इनर लाइन परमिट (ILP) बनवाना पड़ता है उसके बिना स्टेट चेक पोस्ट से अरुणाचल राज्य में एंट्री करने की परमीशन नही है।
अब हम लोग बढ़ते हैं पहाड़ों के ऊपर, जंहा रोमांचकारी ठंड हम लोगों का स्वागत कर रही थी, आगे जाने पर पता चला कि बूम ला पास जाने के लिए अभी दो घण्टे रुकना पड़ेगा, तो हमारे पायलट ने  अपनी गाड़ी Y Junction से Shungetsar Lake जिसे आज माधुरी लेक के नाम से भी जानते हैं, की तरफ मोड़ दी। माधुरी दीक्षित की मूवी कोयला के एक गाने की शूटिंग यंहा होने की वजह से ये माधुरी लेक के नाम से जाना जाने लगा।
वँहा पहुचने से पहले हम लोगों को Panga Teng Tso Lake भी देखने के को मिला जो कि गल के पानी बन चुका था, ये लेक हमेशा फ्रोज़न रहती है लेकिन तापमान बढ़ने की वजह से इस साल पानी बन गया था, यंहा कुछ समय बिताने के बाद हम लोग पहुचे माधुरी लेक और आज यंहा पहुचने वाले सबसे पहले यात्री हम ही लोग थे, तवांग से ये दूरी 36 किलोमीटर की होती है जिसे पूरा करने में लगभग डेढ़ से दो घण्टे का समय हम लोगों को लगा। वँहा ठंड ज़ोरों की थी और साथ मे हवा भी बह रही थी, तो सभी लोग अपने अपने वुलेन आइटम निकाल के पहन लिए, वँहा कैफेटेरिया भी मौजूद है इसलिए यदि थोड़ा समय हो तो यंहा लेक के किनारे बैठकर चाय या कॉफी जरूर पियें, स्वाद दुगुना हो जाएगा। यंहा लेक के एक तरफ जाने के लिए लकड़ी का पुल बना था जो की बुद्धिष्ट पंचशील ध्वजों से सजाया गया था जिसकी भव्यता देखते ही बन रही थी। देखते देखते वँहा टूरिस्ट का जमावड़ा सा लग गया, बोटिंग के लिए बोट भी थी लेकिन उसका पेडल बिगड़ा हुआ था जिसकी वजह से हम लोग पानी के अंदर न घूम सके लेकिन व्यू बहुत ही शानदार था। लकड़ी की एक कमरे नुमा आकृति लेक के बीचों बीच बनाया गया था जो कि चारों तरफ से खुला हुआ था, यंहा से लेक का नजारा एकदम अलग ही दिख रहा था। बच्चों को खेलने के लिए कुछ आउटडोर गेम्स वंही पार्क में बने हुए थे जंहा बच्चों से खूब मस्ती की, कुछ देर बाद हम लोग वापस हुए और Y Junction से बूम ला पास के लिये मुड़ गए। जब भी पहाड़ों पर जाएं वो भी इतनी ऊंचाई पर तो अपने आप को उसी अनुसार मजबूत बना के जाएं क्यों कि सांस वगैरह की दिक्कत होने लगती है इतनी ऊंचाई पर ऑक्सीजन लेवल कम होने से। मैं खुद के लिए पूरी तरह कॉंफिडेंट था क्यों कि 2018 में सिक्किम के जीरो पॉइंट 18200 फ़ीट पर मैं जा चुका था फिर ये तो 15000 फ़ीट था, तो बाकी लोगों के लिये कुछ आवश्यक दवाएं रख ली थीं हमने, वहां पहुचते ही सभी को आर्मी कैफेटेरिया कम कॉमन रूम के जाना होता है और अपना परमिट जमा करने के बाद ग्रुप वाइज आर्मी पर्सनल्स सभी की ले के पैदल ही बॉर्डर तक ले जाते हैं। कॉमन रूम में पहुचते ही एक अजीब घटना घटी,मुझे चक्कर सा आने लगा और मेरे पाँव लड़खड़ाने लगे, फिर हिम्मत करते हुए मैं कॉफ़ी ले के आया और पीते हुए कुछ पल आराम किया और होमियोपैथी की दवा ली, जिससे तुरन्त रिलैक्स हो गया। उसी कॉमन रूम में नाश्ता,गर्म कपड़े वगैरह का स्टाल मौजूद था जो कि पेड सर्विस थी। बच्चों ने अपने हिसाब से अपना नाश्ता आर्डर किया, तभी हम लोगों के ग्रुप का नम्बर भी स गया, फिर वो घड़ी आ ही गयी जिसके लिए हम लोगों ने लगभग 1600 किलोमीटर की दूरी तय की थी, आर्मी पर्सनल हम लोगों को बॉर्डर की तरफ ले जा रहे थे, मन मे एक उत्साह और अजीब सा डर भी था, वँहा बॉर्डर से 10 फ़ीट दूर हम लोगों को खड़े करके वँहा की जानकारी पूरी ब्रीफिंग उन्होंने हमे दी, कई जानकारी हम लोगों को मिली, ब्रीफिंग चल ही रही थी कि हम लोगों से करीब 40 फ़ीट दूर एक चीनी सैनिक आया और उसने दूरबीन द्वारा हम लोगों को देखा फिर अपने वाकी टाकी से कोई संदेश भेजते हुए वापस अपने केबिन की तरफ चला गया, उसका चेहरा पूरी तरह पैक्ड था, हाइट में अमूमन हम भारतीयों से छोटा कद था।
हम लोग अभी सोच ही रहे थे कि माजरा क्या है तभी ऑफीसर ने हम लोगों को बताया कि क्यों ऐसा हुआ।
ठंड बहुत ज्यादा थी तो खड़ा भी नही हुआ जा रहा था, ब्रीफिंग खत्म होते ही वापस हम लोग अपने कॉमन रूम की तरफ बढ़ चले के तभी एक बर्फ का टीला दिख गया, चूंकि वँहा के चारो तरफ की बर्फ पिघल चुकी थी इसलिए ये एक टीला देख के बच्चों के मन मे पर लग गए और हमने आर्मी पर्सनल से अनुमति लेकर बच्चों को बर्फ में कुछ देर खेलने दिया। कॉमन रूम से बाहर पार्किंग की तरफ आने पर प्रसाधन कक्ष बने हैं जिसका उपयोग किया जा सकता है बस पानी सप्लाई के लिए कोई पाइपलाइन नही थी वँहा।

ठण्ड के कारण सभी लोग थकने लगे थे तो हम लोगों ने वापस उतरने का निर्णय लिया। चूंकि ये पूरा का पूरा संवेदनशील एरिया है इसलिए रास्ते में कई जगह हम लोगों ने No Drone Zone का साईन बोर्ड लगा देखा।
हम लोग वापस तवांग अपने होटल पहुच के तुरंत ही अपने पहले वाले पायलट के साथ तवांग मोनेस्ट्री पहुँच गए, होटल जे से वहां पहुचने में हम लोगों को 20 मिनट लगे, फिर कुछ सीढियां चढ़ते हुए हम लोग पहुचे मुख्य मंदिर जंहा तथागत के चरणों मे हम सबने शीश झुकाया और काफी समय वँहा व्यतीत कर वापस अपने होटल आ गए।
अब हमारे होटल के ओनर भाई साहब हम लोगों को अपने निजी साधन द्वारा निःशुल्क रूप (ये लिखना इसलिए जरूरी था क्यों कि अक्सर सुनने में आता है कि होटल व्यवसायी इस तरह के फेवर करके अपना चार्ज भी उसमे जोड़ देते हैं) से अपने घर घुमाने के लिए ले गए, उनका घर Urgeyling Monestry से बिल्कुल सटा हुआ था और मुख्य रूप से उन्होंने उस मॉनेस्ट्री की विशेषता बताई की छठवें दलाई लामा का जन्म इसी मॉनेस्ट्री में हुआ था इसलिए बुद्धिज़्म के पवित्र स्थानों में से एक स्थान ये भी है, वँहा पवित्र जल का सेवन करने के बाद हम लोग पहुँचते हैं उनके घर जंहा उनकी माता जी चाय पर हम लोगों का इन्तेजार कर रही थीं। उनसे मिलकर बिल्कुल भी ऐसा नही लगा कि हम लोग पहली बार मिल रहे हैं, इतना खुशमिजाज स्वभाव की पूछिये ही मत। हम लोगों को बिल्कुल भी नही  लग रहा था कि हम लोग अपने घर से दूर किसी दूसरे प्रदेश में, अनजान जगह पर बैठे हैं, बिल्कुल घर के जैसा माहौल मिला उनके यंहा। उनके सानिध्य में एकाक घण्टे बिताने के बाद माता जी से आशीर्वाद लेते हुए और फिर आने का वादा करके, हम लोग निकले Tawang War Memorial का शो देखने, होटल के ओनर भी हम लोगों के साथ गए कि रास्ते मे कोई असुविधा न हो हम लोगों को। 6 बजे से लाइट शो शुरू होना था जबकि हम लोग 4:30 बजे ही टिकट लेकर अंदर आ गए थे और लगभग सारी सीट फुल भी हो चली थीं, फिर 6 बजे से लाइट शो शुरु हुआ जिसमें अरुणाचल की कहानी और चीन युद्ध के बारे में जानकारी दी गयी। वँहा से हम लोग तवांग मार्केट मा काली होटल में डिनर करते हुए अपने होटल वापस पहुचे। होटल में पहुचने पर पता चला कि होटल ओनर भाई साहब के कुछेक दोस्त/भाई हम लोगों से मिलने के लिए मौजूद थे,फिर हम लोगों ने मुलाकातें कीं और विभिन्न मुद्दों पर चाय के साथ चर्चा चली।
मिलते हैं कल सुबह
एक नए सफर में

वॉर मेमोरियल एंट्री टिकट 50 ₹ प्रति हेड,
मां काली होटल में भोजन (वेज थाली) 120₹ प्रति थाली

क्रमशः

















































 

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