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पूर्वोत्तर राज्य की सैर (नौवां दिन)

चलिए शुरू करते हैं आज का सफर

कल रात सोने में थोड़ा देर हो गया था और  थकान भी हावी थी तो सबके साथ डिनर करके आते ही नींद आ गयी, कुछ मीठे अनुभवों और अंकल जी द्वारा पुराने समय की कहानी को सुनने के बाद मन तो एकदम प्रफुल्लित था क्यों कि आप जिस जगह घूमने जाते हैं और वँहा मौजूद गाइड से भी बेहतरीन अनुभव वँहा की ज़िंदगी जीने वाला शख्स ही बता सकता है और हमारे होस्ट अंकल ऐसे ही थे, इस उम्र में भी एनर्जेटिक, उनके अनुभव सुनते हम लोगों का डिनर भी रेडी हो गया और सब लोग खाना भी खा लिए वो भी बड़े चाव से ।
आज दिन था अरुणाचल से हम लोगों के रुख़्सती का, न चाहते हुए भी उस क्षेत्र को छोड़कर अपने कर्म भूमि के लिए निकलना जरूरी था। अरुणाचल के मोनपा ट्राइब के लोगों द्वारा इतना प्यार,स्नेह,अपनापन मिला कि जीवन पर्यन्त वो अनुभव भुलाये नही जा सकते। उन्होंने अपने सभ्यता के अनुसार हम सभी लोगों को 'खड़ा' से सम्मानित करते हुए अपने टेमरी परंपरा का निर्वहन किया।
इसमे एक सफेद गमछे/अंगवस्त्र की तरह के कपड़े को मंत्रोच्चार करते हुए सभी को गले मे पहनाया जाता है, और बच्चों को यही प्रक्रिया हरे धागे से संपादित की जाती है जिन्हें ये अपनी भाषा मे टेमरी कहते हैं। अरुणाचल प्रदेश और वँहा के लोगों से जुड़ीं अनगिनत यादें और असंख्य अनुभवों को अपने ज़ेहन में रखते हुए हम लोग दिरांग से गुवाहाटी के लिए निकल पड़े।
लगभग 45 किलोमीटर दूर बोमडिला मॉनेस्ट्री पड़ी जंहा समयाभाव की वजह से घूमना सम्भव न हो सका क्यों कि कामाख्या मंदिर दर्शन भी करने का प्लान आज ही था, ग्रुप के कुछ सदस्यों के जरूरी कार्य की वजह से ट्रिप एक्सटेंड नही किया जा सका, अतः हम लोग बोमडिला से सीधे आगे बढ़ चले।
दिरांग से करीब 90 किलोमीटर चलने के बाद नाश्ता वगैरह के लिये हम लोग Tenzin Village के Hotel Tibet Shadow पर रुके, वो होटल बहुत ही बढ़िया था, साफ सफाई  बहुत ही बढ़िया थी, वाशरूम भी बहुत बेहतर था, वँहा की ओनर से पता चला कि 120 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से भोजन उपलब्ध है वो भी एकदम ताजा, चाय 10 ₹ कप मिली  और चाय का स्वाद भी बेहतरीन था।
 कुछ देर रुकने के  पश्चात सीधे निकले बालेमू, प्राकृतिक नजारों को देखते हुए और ठंड को पीछे छोड़ते हुए हम लोग एंट्री करते हैं आसाम राज्य में जो कि जिला ऊदलगुरी पड़ता है। चूंकि हमे जल्दी पहुचना था क्यों कि मंदिर में एंट्री करने का अंतिम समय, मंदिर की वेबसाइट पर शाम के 4:30 पर दिखा रहा था, इसलिए बिना कंही रुके हम लोग आगे बढ़ते चले गए, गुवाहाटी का पुल पार करते ही लगा ये कंहा आ गए, उधर 10 दिन का समय बिल्कुल भीड़ भाड़ से दूर, शोर शराबे से मीलों दूर रहे और यंहा आते ही जाम से परेशान। गुवाहटी शहर के बीचों बीच दे होते हुए हम लोग पहुचते हैं गुवाहटी जंक्शन के पार्सल वाले गेट पर, क्यों कि वंही हमारा लॉज बुक था ताकि सुबह 6 बजे वाकिंग डिस्टेंस से हम लोग अपनी ट्रेन पकड़ सकें।
लॉज में एंट्री वगैरह की फॉर्मेलिटी कर खाली होते ही तुरन्त स्नान हुआ क्यों कि मन्दिर जाना था और रास्ते भर धूल वगैरह भी काफी मिला आसाम के रास्तों पर।
लॉज से बाहर निकल के ऑटो की खोज की गई और दो ऑटो 350 प्रति के हिसाब से मंदिर तक पहुचाने के लिए तय किया गया।
मंदिर के गेट से चढ़ाई काफी ज्यादा है इसलिये यदि दिन भर का समय है आपके पास तो पैदल चढ़ते हुए प्रकृति,चढ़ाई और सुंदर नजारों का आनंद लेते हुए मंदिर तक पहुचें। हम लोग सीधे मन्दिर तक पहुचते हैं क्यों कि मंदिर में एंट्री बन्द होने का डर था, कुछ सीढियां चढ़ के हम लोग मंदिर प्रांगण में दाखिल हुए और वेटिंग हॉल में जा के बैठ गए, फिर जब हम लोगों की बारी आई तो हम लोग पिंजरेनुमा रास्ते मे एंट्री कर गए, वेटिंग हाल में कूलर वगैरह लगे हुए थे और बैठने की बहुत अच्छी व्यवस्था थी, फिर जब लाइन में लगे तो वँहा भी पंखे लगे हुए थे जिसमें कुछ चल भी रहे थे और उसी पिंजरे नुमा गली में एक तरफ बैठने के लिए स्टील के बेंच लगे हुए थे, मतलब यदि आप लाइन में लगे हैं तो आपको बैठने की समस्या नही होगी, फिर कुछेक घण्टे के बाद गर्भगृह से ठीक पहले एक और गली में एंट्री होती है जिसमे एसी भी लगा हुआ था, ठंडी ठंडी हवा से हम लोग तरोताजा महसूस किए फिर गर्भगृह में पहुचने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। अंदर माँ कामाख्या के गर्भगृह से उनका प्रसाद प्राप्त करते हुए बाहर निकले  और दीप प्रज्वलन करते हुए पूजा पूर्ण की गई। वर्तमान में मंदिर में VIP दर्शन बन्द था जिसका शुल्क 500₹ प्रति श्रद्धालु है, सामान्य पंक्ति के लिए कोई शुल्क नही है। मंदिर में जाने से पहले जंहा से भी प्रसाद लें वँहा प्रसाद की की कीमत पहले ही तय कर लें क्यों कि वो लोग कहते हैं कि आने पर हिसाब हो जाएगा और आने पर मनमाना रेट लगाते हैं जो कि हम लोगों के साथ ऐसा हो गया। कुछ समय वँहा बिताने के बाद हम लोग मंदिर से वापस अपने लॉज के लिए निकले, बाहर साधन के रूप में मारुति वैन उपलब्ध थीं जिसे मोलभाव करते हुए 350₹ में तय किया गया।
शरीर मे थकान पूरी तरह हावी थी, लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद आराम तो चाहिए, फिर भी भोजन के लिये हम लोग बाहर निकले और पास ही एक रेस्टोरेंट में 60 ₹ प्रति थाली के हिसाब से वेज थाली खाई गयी, जिसमे रोटी का बिल 10₹ प्रति पीस के हिसाब से अलग से देय था। भोजन का स्वाद अच्छा था। पेट पूजा करने के बाद मार्केट घूमने की बिल्कुल हिम्मत नही बची थी लेकिन ग्रुप के कुछ सदस्यों का मन था घूमने का, फिर सभी ने अपना मूड बदलते हुए लॉज की तरफ रुख किया और चले सभी लोग सोने।
क्रमशः










































 

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